पं दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज, जैनपुर ब्लॉक-गुलावठी जिला- बुलंदशहर

उत्तर प्रदेश

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पं दीनदयाल उपाध्याय ( जन्म 25 सितंबर 1916 -11 फरवरी 1968 ) राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के चिंतक और संगठनकर्ता थे। वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को “एकात्म मानववाद” नामक विचारधारा दी। वे एक समावेशित विचारधारा के समर्थक थे जो एक मजबूत और सशक्त भारत चाहते थे। इसके प्राप्ति के लिए दीनदयाल ने “अंत्योदय” की विचारधारा प्रस्तुत की।

श्रीमती कमलेश

प्रधानाचार्य
एम.ए.,एम.एङ, एलएलबी

प्रधानाचार्य संदेश

“ शिक्षा का व्यक्ति के जीवन में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। विद्यालय वह स्थान है जहाँ बालक में मानवीय गुण विकसित किए जाते हैं। विद्यालय का उद्देश्य बालक का सर्वागीण विकास करना है।जिससे वह आत्मनुभूति एवं आत्माभव्यक्ति की स्थिति को प्राप्त कर सके।बालक को शिक्षा एक आनंदायी प्रक्रिया के रूप में प्रदान की जा सके बालक के संज्ञानात्मक विकास के साथ ही विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर उसे साजानेत्तर विकास के अवसर प्रदान किए जाये।बालक में संवैधानिक मूल्य (स्वतंत्रता,समानता,धर्म निरपेक्षता,समाजवाद,बंधुता,व्यक्ति की गरिमा, देश की एकता एवं अखंडण्ता) पोषित किए जाये।चरित्र निर्माण तथा व्यवसायिक कौशल उत्पन्न करना वर्तमान समय की मांग है। विद्यालय का उद्देश्य विभिन्न विषयों को पढ़ाई जाने के साथ ही मूल्य परक एवं पर्यावरण परक शिक्षण किया जाना चाहिए।

“मैं विद्यालय के छात्र-छात्राओं के उज्जवल भविष्य की कामना करती हूँ।”

विद्यालय का परिचय-

माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश में मॉडल स्कूल की स्थापना की गयी। बुलंदशहर में अभी 10 मॉडल स्कूलों की स्थापना हुई। जिसमें एक विद्यालय बुलंदशहर जिले के जैनपुर गांव में स्थित है इन विद्यालयों का नाम बाद में बदलकर पं दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज कर दिया गया पं दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज जैनपुर ग्राम जैनपुर ब्लॉक-गुलावठी जिला- बुलंदशहर में स्थित है।यह विद्यालय सत्र 2018-19 से संचालित है।यह भूड़ चौराहे, बुलंदशहर से मेरठ रोड पर 8.5 किलोमीटर दूरी पर सुरम्य वातावरण में स्थित है।

उद्देश्य-

  1. शिक्षा का सार्वभौमीकरण ।
  2. गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करना ।
  3. समावेशी शिक्षा को पोषित करना ।
  4. विद्यार्थियों का  सर्वांगीण विकास करना ।
  5. व्यवासायिक शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना ।
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